मुझे बताना था
कि जहां से देख रहे हो,
देख नहीं पाओगे
अँधेरा मेरा
तुम्हारे और मेरे अँधेरे के बीच
एक लकीर
रौशनी की नहीं
फ़र्क की है
कि मैं घुल सकूँ तुम्हारे अंधेरों में
कि रौशनी नहीं तो ना सही
अन्धेरा छुए तुम्हारा गाल
इतने प्यार से
कि खिल उठे मन तुम्हारा
वो स्पर्श हो जाऊं
क्यारी में सजा जो
कभी कोई फूल
मचलकर तोड़ा हो
तो वो फूल मुझे कभी जगह ना दे
कि सूरजमुखी का फूल जो देखा नहीं कभी मैंने
मुझे जगह देगा
कि अपनी आत्मा से भी ज्यादा
कोई चाह सकता है किसी को
ये मैंने जाना
जब तुम्हें चाहा.
2. खरगोश
जन्मदिन
मुझे याद नहीं जन्मदिन का कोई उत्साह
या बचपन की इससे जुडी कोई याद
एक चलचित्र है
जब मैं चार साल की थी
और मेरे जन्मदिन पर धूम मची थी
मैं तब भी अनभिज्ञ थी
कि वह मेरा दिन था
एक ऐसा दिन जिसे मैंने नहीं चुना
उसपर उत्सव जैसा कभी कुछ मुझे महसूस भी नहीं हुआ
कोई फ़ोन करता बधाई देता मैं झेंप जाती
तुमसे शुरू हुई सब तारीखें
तारीखें जिन्हें तुम्हें चुनकर
मैंने खुद चुना
26 मार्च
प्यार की तारीख
एक खोज है
जो इसी रास्ते से होकर गुज़रती है
इस रास्ते पर दिल बस दुआओं से भरा होता है
कि मुलायम खाल के नीचे चिहुंकता दिल
कोई शिकारी ना देख ले
बेशक तुम सारी दौडें हार जाना कछुओं से
पर नहीं बनोगे कभी हार का उदाहरण
मासूमियत और चपलता ही तुम्हारे गुण होंगे
ये दौडें तुम्हारे लिए नहीं
बस मेरे पास चले आना
और आज
23 अप्रैल
प्यार के जन्म की तारीख
तो खरगोश कब जन्में थे तुम?
क्या हमेशा से यहीं थे?
3. अँगारे
सखा
जब तुम आओगे मेरे द्वार
तब देखना
यहाँ लोहे की जंजीरें नहीं हैं
बस दहकते अँगारें हैं
छोटे से दायरे में नहीं पैदा होने दिया कोई डर
जुराबों की बदबू से नथुने ना फटें
और टीवी पर होती बहसें नसों से ना करें खिलवाड़
एक छोटा बच्चा जेब में छुरा लेकर ना घूमें
पैर में पाजेब पहने दो रुपए माँगती 6 साल की लड़की
या शायद 8 की
को देखकर बलात्कार का डर
कोई डर पार नहीं होता अंगारों की दहलीज से
पर दिल पर नहीं इनकी हुकूमत
ये जलता भी है
दहकता भी है और
और
और डरता भी है।
डर के बहुत से रूपों में से
सबसे खतरनाक है
अनिच्छा
प्यार ना करना
कभी अनिच्छा से
सखा
आत्मा को यूँ चूमना कि बरस जाएँ सृष्टि
अँगारें ना बुझे
डर मरे कभी ना
सबकुछ जिये
हमेशा।
प्यारे
तुम जिओ
मेरे डर जिये
मेरी दुआओं में तुम यूँ हो कि
आँख झपकूँ जो तो तुम्हारी तस्वीर
बंद और खुली आँखों में
तुम्हारी भीगी सी डूबी सी आंखें
मेरे सीने पे पत्थर सी गड़ जाती हैं
तुम जिओ मेरे लाल
ये बात मैं कुछ यूं कहना चाहती हूँ कि
छोटे से घोंसलें में समेटकर तुम्हें
तुम्हारे घुँघराले बालों में फिराऊँ उंगलियां
और अपनी गोद के रास्ते तुम्हें गर्भ में भर लूँ
यह कहना कैसी सी शर्म पैदा करता है
मन दुआओं और प्यार से भरा है
बाबू मेरा
असंख्य लोग, तारें, फूल, कण-कण, क्षण-क्षण
तुझे दुलारे
ठंडे पड़ जाएं तेरे लिए
सारे अँगारें।