Saturday, 19 September 2015

टूटकर करेंगे प्रेम

कि.....

कि कितनी ही बातें हैं
जो होनी हैं हमारे दरमियाँ
कि कितनी ही शामें
गुज़ारनी हैं एक साथ
कि कितनी ही बार लिखनी हैं
ऊँगली से तारीखें रेत पर।

कि तुम सुनना मेरी आवाज़
जब शब्द चुक जाएँ
कि बस आस-पास कहीं
खड़े हो जाना
जब लगूँ हारने।

कि हम बचाएँगे ये दुनिया
प्यार और आँसुओं से
कि रखेंगे दिल के साथ
आँख और कान भी खुले
कि पहचानेंगे
दुःख और अपमान।

कि हम भीगेंगे
झमाझम बारिश में
बर्फ के गोले
भर लाएँगे अपनी जेबों में
हाथ थामकर
ऊँचे-ऊँचें पहाड़ चढ़ेंगे
समंदर की लहरों पर
धसकते रेत पर
उड़ेंगे एक साथ
जो कहना है
वो बस इतना कि
टूटकर करेंगे प्रेम !

Tuesday, 8 September 2015

इंद्रधनुषी झाग

अपनी एक टांग पर लटके
उधड़े हुए मुर्गों की तरह
खामोशी में डूबी दुनिया
बेतहाशा शोर से भरी है
ये दुनिया भरभराकर ढह रही है
ये दुनिया और कोई नहीं
हम हैं हम से है
हम वो प्रजाति हैं
जो ढहते हुए भी साँस ले रहे हैं
उनसे क्या ही कहा जाए
जिन्हें कहीं कुछ नहीं छूता !
किरचें
जो तस्वीर को हमेशा
अधूरा ही रखेंगी
चटके हुए कोने
 जो कभी नहीं जुड़ेंगे
शुरुआत कितनी सादा
पर कितनी प्यारी
फिर सब कितना जटिल
आशा और निराशा
एक ही बिंदु पर आ टिकी हैं
यह बिंदु हमारा नहीं
इतिहास हमारा नहीं
भविष्य भी हम नहीं
हम बस आज हैं
अभी इस पल हैं
अगले ही पल हमें
झटक दिया जाएगा
हम वो झाग हैं
जो खुद में
 एक पूरा इंद्रधनुष समेटे हैं
पर जिनका कोई आकाश नहीं !

Friday, 4 September 2015

दुनिया की सबसे खतरनाक क़ौम

वे जो माँग लाये थे
कटोरी में बचपन
उछालकर फेंकते हैं
कालिख चाँद के मुँह पर
रोशनियाँ उन्हें पसंद नहीं
अपने ही मन में छिपे
खल पात्र  को
छिपाने में सिद्धस्त लोगों की भीड़ में
आँखों में उतार देते हैं आँखें
जिनकी छाती दरक जाती है
सच सुनने से
उनके कानों में फूँकते हैं सच्चाई का सीसा
उनकी लम्बी अदृश्य पूंछ पर
 पाँव रखते हैं बार बार
उनकी छटपटाहट पर पीटते हैं तालियाँ

ये  दुनिया की सबसे खतरनाक क़ौम है
जो होरी की तरह गर्दन दबाये पैरों को नहीं सहलाती।


रास्ते

मैं जहां भी गई  भागकर खुद से मेरे सपनों की किर्चें मेरे साथ गईं कहीं भी कभी भी चुभती हुई सी जैसे लंबा सफर तय करना हो पैदल और जूता पैर काटता ...