Tuesday, 14 November 2017

चलो अब मुस्कुराओ

सबको बताओ कि क्या चाहिए
उनसे या खुद से
ज़रा मुस्कुरा के

थोड़ा गुनगुना के शायद
या नन्ही सी गिड़गिड़ाहट मिलाकर
पर ऐसे कहो
कि न कहना बचा रहे

रुको
थोड़ा सा और सोचो
अरे इतनी जल्दी नहीं रे
ज़रा हिम्मत और

ना समझने दो
फ़र्क़ नहीं पड़ा?
पड़ना ही नहीं था
बस कहना ज़रूरी था

मौक़ा जो खुद को दिया
उनके नाम पर

तस्वीरों में तलुए थे
कैसे जानोगे
जब देखोगे ही नहीं तो

देखो
धुँधली आँखों से ही सही
पोंछों अब ये भाप
नज़र साफ़ करो

क्या दिखा
बेवकूफियाँ और नादानियाँ ही ना
यही तो बचाना तय था

चलो अब मुस्कुराओ।

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