बहुत तेज़ी से आस-पास लोग गुज़र रहे थे
सभी को कहीं पहुँचना था
सभी का ध्यान अपने अँगूठे पर था
उसकी एक छाप के इर्द-गिर्द थी सारी सुबहें
अँगूठा नहीं गिना
जब भी गिनी सेकंड्स
गिनती
एक दो तीन.....दस..पचास..सौ
समय का यूँ बीतना
जेबों का भरते जाना
ये कब हुआ
सोचने को ज़रा देर रुक पाते
कुछ सांस आती
एक सीढ़ी पर कई पायदान चढ़ने पर भी
ऊँचाई में फ़र्क नहीं पड़ता
बस दम उखड़ता जाता.
सभी को कहीं पहुँचना था
सभी का ध्यान अपने अँगूठे पर था
उसकी एक छाप के इर्द-गिर्द थी सारी सुबहें
अँगूठा नहीं गिना
जब भी गिनी सेकंड्स
गिनती
एक दो तीन.....दस..पचास..सौ
समय का यूँ बीतना
जेबों का भरते जाना
ये कब हुआ
सोचने को ज़रा देर रुक पाते
कुछ सांस आती
एक सीढ़ी पर कई पायदान चढ़ने पर भी
ऊँचाई में फ़र्क नहीं पड़ता
बस दम उखड़ता जाता.
No comments:
Post a Comment