Friday, 19 May 2017

वापसी

एक खुशबू की तलाश में
सपने में सब बह जाता
या शायद सपना ही बह जाता
जिसमें प्रवेश या वापसी
कोई चुनाव नहीं

ऐसा बहुत कुछ था
इर्द-गिर्द
जिसे नहीं मिला समय या ध्यान
सबकुछ सोख लिया
बस एक सवाल ने
वो सवाल भी ठीक ठीक कहाँ पता था
वापसी
कभी भी, कहीं से भी हो सकती थी
वापसी कहीं नहीं हो सकती थी.

कोई ठिकाना नहीं था लौटने के लिए

2 comments:

  1. सवाल था या उलझन
    स्वप्न था ??

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  2. सवाल था या उलझन
    स्वप्न था ??

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