कौन सी शक्ति थी
जो हमें गिरने से पहले जी भर दौड़ने से रोकती थी
दौड़ इतनी लंबी होती कि आग खत्म हो जाती
गिरना इतना लंबा और धीमा होता कि
हवा ख़त्म हो जाती
खिड़की कोई या ईमारत होती
यूँ तमाशा ना होता जीना
और मृत्यु बीच सड़क लटके हुए
पड़ोसियों की इकट्ठा भीड़ के बीच
कुछ जाने पहचाने चेहरे देख सकती
हम हदों में रहे और जिए लोग
हदें तोड़ सकते
और अति ना होती।
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