6 बजे के अलार्म के बजने का इंतज़ार
सुबह 5.30 से करती
या शायद पूरी रात करती
उठती, पानी पीती, टाइम देखती
और अंदाजा लगाती
कि कितनी देर और भुलाया जा सकता है
शोर और सन्नाटे को एक साथ
क्या कभी ऑफिस में
कड़क कॉटन की सारी पहने
काम करती हुई माँ का ग्रेस देखा है
जिसे बगलों और पीठ पर पसीने से गीली
एक पुरानी मैक्सी में
सुबह और शाम
बस रसोई में
देखने की आदत है?
बेटे, तुम छोटे हो
पर क्या इतने कि
मामूली सवाल तक अपने पिता से ना कर सको?
सुबह 5.30 से करती
या शायद पूरी रात करती
उठती, पानी पीती, टाइम देखती
और अंदाजा लगाती
कि कितनी देर और भुलाया जा सकता है
शोर और सन्नाटे को एक साथ
क्या कभी ऑफिस में
कड़क कॉटन की सारी पहने
काम करती हुई माँ का ग्रेस देखा है
जिसे बगलों और पीठ पर पसीने से गीली
एक पुरानी मैक्सी में
सुबह और शाम
बस रसोई में
देखने की आदत है?
बेटे, तुम छोटे हो
पर क्या इतने कि
मामूली सवाल तक अपने पिता से ना कर सको?