अनुत्तरित सवालों पर खेद जताया
कई दोस्तों को व्हाट्सएप्प किया
कई दोस्तों को व्हाट्सएप्प किया
कईयों की नाराज़गी उठायी
अपनी लगातार अनुपस्थिति
के कारण गिनवाएं
बेहिसाब सच के साथ कई झूठ बोले
जो कहती कि
नहीं थी उपस्थित खुद अपनी देह में भी
तो नहीं करते यकीन
सो गिनवाई व्यस्तताएँ
फिर एक रोज़ जब वे सब लौट आए
मैंने ताला लगा लिया भीतर से
और खूब हँसी
किस पर?
खुद में एक और शख्स का उग आना
वे दरवाज़े पीट रहे थे
मैं खुद को बचा रही थी
मैं बंद अँधेरे कमरे में
अवांछित उपस्थितियों से घिरी थी
वे बाहर भीतर सब जगह थे
वे कहीं नहीं थे
ये मेरा निमंत्रण था
अतिथियों लौट जाओ।


