Friday, 29 March 2019

वीड

एक जंगली पौधा
जो नहीं पनपने देता अपने आस-पास दूसरे पौधों को
उसे उखाड़ फेंकते जड़ों से लोग

फ़िर कुछ लोगों ने प्यार करना शुरु किया
उस पौधे से
अपने प्यार में वे क्रूर होते गए तमाम दूसरे पौधों के प्रति
प्यार को कैसे करें परिभाषित

बात लेकिन ये है
कि फ़िर कभी नहीं खिले फूल ..

Monday, 25 March 2019

हमारी दुनिया में

ये जो हमारी दुनिया है
इसमें कमज़ोर लोग ज़्यादा हैं
पर ताक़तवर लोगों की शक्तियाँ 
कमज़ोर लोगों की कुल जमा कमज़ोरियों से ज़्यादा हैं

कारण?

जिन लोगों के पास 
शक्तियां नहीं होती 
होती है बस कमज़ोरियां 
वे अपने से शक्तिमान लोगों को
नहीं सौंप पाते अपनी कमज़ोरियों के सिवाय कुछ भी 
जैसे कहते हैं कि कुछ लोग ब्रह्मास्त्र अर्जित करते थे लंबी तपस्याओं के बाद
ऐसे ही अर्जित की जाती हैं कमज़ोरियाँ 
इंसान बनने की लंबी तपस्या के बाद

एक एहसास है 
जो हर झड़ते पत्ते के साथ 
अपनी अन्यतम शांति में कहता है
कि दुनिया को आज भी
कैंचियाँ नहीं इंसान चाहिए 

कमज़ोरियों का ये बखान मैं यूं ही नहीं कर रही हूँ
इसमें कुछ तथ्य है
इसमें मेरी अभी तक ली गयी तमाम श्वास हैं

हम भूल जाते हैं अक्सर
कमज़ोरियां ही 
हमारी ताक़त थी 
जिसे अब शक्तिशाली लोग इस्तेमाल करेंगे 

हमें अपनी कमज़ोरियों को वापस हासिल करना है 
फिर से उतना ही शक्तिशाली होने के लिए 
जितने होते हैं दुनिया में कमज़ोर लोग
क्योंकि कमज़ोर लोग कैंचियाँ नहीं हो पाते । 

Friday, 22 March 2019

मन नहीं टूटेगा

उन्हीं में खोजना था सब 
जिन्हें लगता था 
बुद्धि के अंकुर उन्हीं के आँगन में फूटे थे पहली बार 

सबको देखना था 
एक सिरे पर ठहरकर 
किनारे जब टूटे 
तो बह गया बहुत सा वक़्त

हर बार साबित करना था 
उनके सामने जो जाने जाते थे
ना आंकने के लिए आदमी की औकात

मुझे बस तुमसे कहना था 
कि मत तौलना कभी दुनियावी पैमाने पे
किनारे टूटेंगे 
लोग छूटेंगे
लेकिन मन
मन नहीं टूटेगा 
जो तुमसे जुड़ा।  

उदास लड़का

एक कमरा है
एक खिड़की
एक लड़का है
खिड़की से धूप दीवार पर कोई चित्र सा बनाती है
चित्र पर मेरी पीठ छपती दिखाई देती होगी
पीठ पर चित्र

तस्वीरों में आईने नज़र आते हैं

धूप क्या हमेशा मुट्ठी में भरकर उम्मीद फेंकती होगी कमरे में
या कभी मन को राख भी करती होगी
धूप सबकी अलग-अलग जो होती है

कभी कोई भरम कोई जादू हो जाता है लड़का

उदास लड़का

रास्ते

मैं जहां भी गई  भागकर खुद से मेरे सपनों की किर्चें मेरे साथ गईं कहीं भी कभी भी चुभती हुई सी जैसे लंबा सफर तय करना हो पैदल और जूता पैर काटता ...