Friday, 23 March 2018

अधूरी कविताएँ - 5

दो बातें थी
कहना ना हो सका
ड्राफ्ट्स में पड़े-पड़े रो दी
खुद में प्यारी थीं
चिंगारी सी गर्म कहीं लेकिन
सच की आदत नहीं थी
चुप रहना गुण नहीं
हथियार था

हथियार कौन रखते हैं,
जानते हैं आप.

Wednesday, 21 March 2018

अधूरी कविताएँ - 4 बहनें

एक ही केंद्र पर
सिर टिकाये बैठी
त्रिज्या हुई जा रही बहनें
परिधि पर मिलकर कहीं
मुस्कुराती हैं
कि सखी मेरे बचपन की
रोने को बाकी समय बहुत है  

Tuesday, 20 March 2018

अधूरी कविताएँ - 3

हमने अलमारी में बंद रखी
मरे हुए आदमी की ज़िन्दा कविताएँ
और ज़िन्दा रखा उसे
मरी हुई कविताओं में !

रास्ते

मैं जहां भी गई  भागकर खुद से मेरे सपनों की किर्चें मेरे साथ गईं कहीं भी कभी भी चुभती हुई सी जैसे लंबा सफर तय करना हो पैदल और जूता पैर काटता ...