एक ही केंद्र पर
सिर टिकाये बैठी
त्रिज्या हुई जा रही बहनें
परिधि पर मिलकर कहीं
मुस्कुराती हैं
कि सखी मेरे बचपन की
रोने को बाकी समय बहुत है
सिर टिकाये बैठी
त्रिज्या हुई जा रही बहनें
परिधि पर मिलकर कहीं
मुस्कुराती हैं
कि सखी मेरे बचपन की
रोने को बाकी समय बहुत है
बहुत खूब....आप बहुत अच्छा लिखते हैं.... आपका fan हो गए हैं..👌👌
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