हमने अलमारी में बंद रखी
मरे हुए आदमी की ज़िन्दा कविताएँ
और ज़िन्दा रखा उसे
मरी हुई कविताओं में !
मरे हुए आदमी की ज़िन्दा कविताएँ
और ज़िन्दा रखा उसे
मरी हुई कविताओं में !
मैं जहां भी गई भागकर खुद से मेरे सपनों की किर्चें मेरे साथ गईं कहीं भी कभी भी चुभती हुई सी जैसे लंबा सफर तय करना हो पैदल और जूता पैर काटता ...
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