Wednesday, 31 May 2017

हैंडराइटिंग

एक अलग ढंग से सुंदर लिखने की कोशिश
कर्सिव में
हर अक्षर को दूसरे से यूँ जोड़ना कि जैसे
अधूरे हों एक दूसरे के बिना
बढ़ते हुए आगे
एक लय में हो

हर बार बदल देना अपने लिखने का ढंग
कि जो लगे सबसे सुंदर
एक-एक अक्षर को अलग-अलग
मोती सा टांकना

परीक्षा ख़त्म होने से चंद मिनट पहले
लिखे हुए अपने ही अक्षरों को देख
हमेशा लगा कि
हकीक़त ये है मेरी
बाकी सब पाखण्ड

पेन्सिल से लिखे को मिटाने पर
पीछे कोरापन नहीं
कुछ रेखाएँ रह जाती हैं
ऐसी ही कुछ रेखाएँ
माथे पर गुद जाती हैं

बड़े होते समझ आया
कि लिखना एक जालसाजी है
तथ्यों को बदलने का एक तरीका भर
चाहे कितने ही सुंदर हर्फ़ों में पिरोया गया हो भले


एक तारीख  के सामने
तथ्य है कि तुम मर गए
कभी नहीं आओगे
मेरे पन्नों में फूलों की छाप के साथ
टूटे-बिखरे पत्तों के पीछे लिखा है
कि तुम आओगे बार-बार
बनाकर लिखी गई वह बात

कहीं खाल में गोदनी ना पड़े
एक हैंडराइटिंग से
एक चेहरे की झलक मिलती रहे
बस.



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