बाइबल नहीं तुम्हारा लिखा
क्योंकि धर्म में कुछ श्रेष्ठ नहीं हमारे लिए
कहते हैं एक उम्र के बाद पुरुष की कठोरता टूट जाती है
वह तलाशता है अपने दंभ को सहलाने वाला हाथ
और स्त्रियाँ ना झुकने का फैसला करती है
जिनकी कमर पर आजीवन घन बजा हो
किसी कंस्ट्रक्शन साइट पर
कोई दुर्घटना हो और चौथे माले से
ढहने लगे सब ईंटें
ऐसे बरसते थे शब्द
जैसे स्वादिष्ट भोजन के बाद
गले में अटका रह गया होएक सूक्ष्म-सा रेशा
एक कोमल सी पलक मुड़कर धंस गयी हो आँख में
शूल की तरह
बातों का अंत
यूँ सोच पर बरसते रहे कोड़े लगातार
जो करना था उसे सोच में इतना झुठलाया कि
झूठ सच हो गया
और सच ये है कि
पिता से प्रेम पर चर्चा नहीं हो सकती
रात भर बाथरूम से
पानी के बहने की आवाज़ आई
रात भर खून बहा नालियों में
दो टाँगों के बीच सिमटता रहा अस्तित्व
और मृत्यु फिर मुस्कुराई
तुम जानती हो सिमोन
कॉलेज में तुम्हें पढ़कर
तुम्हारी तस्वीर देखी नेट पर
और अपना कवर लगा लिया
तुम कोई सहेली लगी
तुम्हारे नाम से छद्म नारीवाद के ताने भी सुने
लेकिन गर्व से
तुम मेरा गर्व रही
दुनिया की हर महत्वपूर्ण घटना से दूर
ज़मीं में कहीं भीतर
कहीं भी उपस्थित ना होकर
मैंने खुद को उगते हुए देखा.

आधुनिक सच्चाई को उजागर किया
ReplyDeleteमर्मात्मक भावात्मक post
बहुत शुक्रिया !
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