Thursday, 20 August 2015

एक रोज़ दफ़्तर से पहले


1 . 

गैस सिलेंडर का रेग्युलेटर बंद तो है ना !
बाथरूम की लाईट , स्टोर रूम का पंखा
पीछे वाले कमरे की लोहे की अलमारी का वो छोटा लॉकर
उसकी चाबी चावल के डिब्बे में रख देना
पीछे से आवाज़ आती है
चश्मा ले जाना मत भूलना
वरना फिर सिरदर्द की शिकायत करोगे
शाम को आते हुए कादम्बरी बुक स्टोर से सेकण्ड PUC कॉमर्स की बुक्स भी पूछ आना
नया सिलेबस
मुझे आने में शायद थोड़ी देर हो जाए
मुस्कुराते हुए वह सब सुनता है
और मुकेश  का एक गीत गुनगुनाता है
शायद...
मैंने तेरे लिए ही सात रंग के....
बेटी को आइसक्रीम के लिए दस रुपये का नोट पकड़ाकर उसने बैग उठाया
दोनों  घर से साथ निकले
थोड़ा जल्दी तैयार हो जाते तो मैं ऑफिस समय पर पहुँच जाती
बस स्टैंड पर सुबह से घर के काम में उलझी पत्नी की
झुंझलाहट भरी फटकार पर वह मन ही मन मुस्कुरा रहा है
तभी सामने से
बस न. 317 आती दिखाई दी
वह दौड़कर बस में चढ़ गया
बस में भीड़ है
उसके पास खुल्ले पैसे भी तो नहीं हैं
वह बार बार अपना पर्स देखता है
और एक सौ का नोट कंडेक्टर की तरफ बढ़ा देता है
12 रुपये के लिए 100 रुपये का नोट देख कंडेक्टर मुह बिचकाता है
आज वह खुश है
समय से दफ़्तर पहुँच जाएगा
ब्रेक !
टक्कर !!
झन्नाटेदार तीन थप्पड़ !!!
तीसरे थप्पड़ के साथ चश्मा उतरकर गिर पड़ा
क्या हुआ बहन जी !
क्या हुआ बहन जी !
देखो ना मेरे ऊपर गिर रहा है
मुँह में शब्द सिमट गए
बस से उतरा तो
ज़मीन कुछ ऊपर उठी हुई थी
पैर कुछ नीचे पड़ते थे
वह जिस जगह उतरा
उसका नाम उसे ध्यान नहीं था
वह दफ़्तर नहीं गया
वह घर भी नहीं गया
आज जाने दिनभर क्या करता रहा !


2 . 


बस न. 317 में
उसे जाते देख
अचानक खाते-खाते उसके माथे पर आ जाने वाली पसीने की बूँदें
बढ़ते BP और शुगर के बारे में सोचते हुए
उसकी आँखें भर आई
10 रुपये के टिकट वाली प्राइवेट बस में
दरवाज़े पर लटके लड़कों को ठेलती हुई
वह अंदर घुस गयी
पीछे हल्के-हल्के
कुछ सहलाने की हलचल महसूस हुई
आहिस्ता से पीछे मुड़कर देखा
पैंट की जिप खोले खड़े आदमी ने नितम्ब पर चिकुटी काट ली
अपमान से उसका गला रुंध गया
वह भीड़ में रास्ता बनाते हुए
उस जगह से हटी
पर अब सभी कोहनियाँ उसकी छाती को
और सभी हथेलियाँ उसके नितम्बों को छू रहे थे मानो
आँसुओं को दबाते हुए बस से उतरी तो
अचानक ही
ऑफिस में पीछे से पीठ पर हाथ फेरकर
हालचाल पूछने वाले गुप्ता जी का ध्यान आया
वह ऑफिस नहीं गई
वह घर भी नहीं गई
आज जाने दिनभर क्या करती रही !


4 comments:

  1. शब्दों में न बयान की जाने वाली अनुभूति बहुत अच्छे अदिती

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  2. शब्दों में न बयान की जाने वाली अनुभूति बहुत अच्छे अदिती

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