उस लड़की का संघर्ष
तुम उस लड़की की आँख से देखते हो जिसे
संघर्ष का अर्थ भी नहीं पता
वो जो तुमसे अक्सर ही पूछ बैठती है
'क्या मैं सुन्दर हूँ'
और तुम्हें ज़वाब देने में कठिनाई होती है
मैं उस लड़की को बताना चाहती हूँ
मैंने भी इस सवाल का सामना किया है
जवाब कोई नहीं दे पाया
तुम्हें भी नहीं मिलेगा
बस प्यार करना होगा
खुद से
तुम जो शिकायतें करती हो
वो उम्मीदें हैं दरअसल
दूसरों से
यही उम्मीदें तुम्हें खुद से रखनी होंगी
खुद अपनी ज़मीं तलाश कर
अपनी पसंद के रंग का आसमां चुनना
तुमपर कोई प्रेमी
शायद कभी कविताएं नहीं रचेगा
पर तुम प्रेम रचना
कविता से ज़्यादा ज़रूरी है प्रेम
ऐसा कितना कुछ है
जो कहना है मुझे तुमसे
क्योंकि इस दिखावे की दुनिया में भी तुम
शिकायतें करती हो दूसरों से
यहां तो मुस्कुराया जाता है
मन में खलिश बची रहती है
पर मुस्कुराकर मिला कर लड़की
समझदारी का लेबल चाहिए तो मुस्कुरा |
तुम सुन्दर हो!
जैसे सब होते हैं
पर सब बचा नहीं पाते अपनी खूबसूरती
या दूसरों की नज़रों में
सुन्दरता का काँच नहीं पिघला पाते
यक़ीनी तौर पर नहीं कह सकती कि
सुन्दरता से मुलाक़ात कभी हुई है मेरी
पर कुछ भला सा काम कर
मैंने खुद को सुंदर महसूस किया
और
कभी मन की कचोट के बीच
बेहद कुरूप
यक़ीनी तौर पर तो
जीवन का पक्ष भी नहीं लिया जा सकता
तय तो खुद ही करना होगा .
No comments:
Post a Comment