Friday, 3 July 2015

जीवन ! तुम बहुत सुन्दर हो !

वे जो सिखाते हैं हमें
कविता की खूबसूरती
बताते हैं
कि कैसे लिखी जाती है कविता
छंद, लय और व्याकरण का
देते हैं ज्ञान
जीवन के व्याकरण से जिनका
नहीं कोई सम्बन्ध
खोजते हैं
 हमारे अर्थहीन जीवन की कविता में
सुन्दर शब्दों का मायाजाल
आप बताइये जीवन की खूबसूरती
फेर लें नज़र विसंगतियों से
लेकिन
हमसे ये उम्मीद ना रखिये
कि
हम लिखेंगे फूलों की क्यारी,
चाँद का टुकड़ा ,
 भँवरें और तितली
चहकती चिड़िया
खिलखिलाता बचपन ,
 प्रेम में वृद्ध दरख़्त
बसंती हवा, बरसात, सावन, झूलें
और जाने क्या-क्या
कहेंगे
कि नहीं देखा कभी
किसी बचपन को बिलखते
नहीं देखा किसी चिड़िया को जून की गर्मी में प्यास से मरते
नहीं देखा बारिश से उजड़ती बस्तियों को
नहीं देखा सडकों पर बिकते जीवनहीन फूलों को
नहीं देखी कभी लू
कुछ नहीं देखा
कुछ भी नहीं
देखा तो यही कि
जीवन !
तुम बहुत सुन्दर हो !


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