लड़ते रहे हज़ार लड़ाइयाँ हर दिन
मरते रहे हज़ार मौतें भी
हर सुबह होता पुनर्जन्म
हर रात सोते एक आख़िरी बार
बार-बार
कैसे करे उन शब्दों पर भरोसा कोई
जिनकी आत्मा में खंजर हों कई
यूं कहना कि आत्मा मर चुकी है
ऐसी बात नहीं है
आत्मा मरती नहीं
पर पलायन कर जाती होंगी शायद
फिर वहाँ नहीं मिलती
जहां ढूंढते रहे हों हम हर मौत से पहले अपनी
जहाँ मैं हूँ
वहाँ सुरक्षा की सभी सम्भावनाओं से परे हूँ
यूं नहीं होना था
कि मुझे महसूस होता डर
और तुम भी होते
होना था तुम्हें
लेकिन डर..
मरते रहे हज़ार मौतें भी
हर सुबह होता पुनर्जन्म
हर रात सोते एक आख़िरी बार
बार-बार
कैसे करे उन शब्दों पर भरोसा कोई
जिनकी आत्मा में खंजर हों कई
यूं कहना कि आत्मा मर चुकी है
ऐसी बात नहीं है
आत्मा मरती नहीं
पर पलायन कर जाती होंगी शायद
फिर वहाँ नहीं मिलती
जहां ढूंढते रहे हों हम हर मौत से पहले अपनी
जहाँ मैं हूँ
वहाँ सुरक्षा की सभी सम्भावनाओं से परे हूँ
यूं नहीं होना था
कि मुझे महसूस होता डर
और तुम भी होते
होना था तुम्हें
लेकिन डर..
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