Thursday, 5 March 2015

. . .तुम्हारे मंज़रों की कैद में!

6 मार्च, 2012

जन्मदिन ! शुभकामनाएँ दी जानी चाहिए, लेकिन क्या शुभकामना दूँ तुम्हे ! वहाँ की खबर भी तो नहीं है...अँधेरा हो तो उजालें भर जाएँ...शोर हो तो शांति मिले...गम हो तो खुशियाँ बिखर जाएँ...निराशा हो तो आशा का सूरज उगे...भूख-प्यास हो तो तृप्ति मिले...बस तुम खुश रहो...कोई दुःख कोई तकलीफ आस-पास न रहे तुम्हारे !  याद तो तुम भी करते ही होगे हमें, आज तुम्हारे जन्मदिन पर तुमसे जुडी तमाम अच्छी बातों को याद करना चाहती हूँ बस। जन्मदिन के उत्सव पर दुःख या निराशा का क्या काम !

तुम्हारी कही बातें ! तुम्हारी अनकही बातें ! हमारी अपनी समझ की सीमा ! कितना कुछ ! वे हैरान कर देने वाली एब्सर्ड सी बातें, जैसे उनका कोई अर्थ ही ना हो या जैसे शायद उनमें कोई बहुत गहरी बात छिपी हो। दुनिया में अर्थहीन बेमतलब कुछ भी नहीं, हम समझ ना सकें यह अलग बात है। दरअसल हमें एक ख़ास ढंग से नपे-तुले अंदाज़ में सोचने की आदत हो गई है, हर अर्थ, हर व्याख्या, हर भाव को सीमित कर देते हैं। अगर जो कहीं कोई इसका अतिक्रमण करने लगे तो वहीँ हमारी समझ की सीमा पर हमला होने लगता है..तमाम घटनाएँ तिलिस्म लगने लगती हैं। 

प्यारापन और मासूमियत जब तक थोड़ी भी शेष है दुनिया में तब तक तुम भी हो!


स्मृतियाँ और अतीत ! अतीत तो अतीत होता है बाज़ दफा खूबसूरत और चमकीला तो बाज़ दफा बदरंग और भयावह। पर उसमें झांकना जरूरी सा हो जाता है, कुछ समय के लिए ही सही उन गलियारों में घूम आना चाहिए। कुछ देर उस खिड़की पर खड़े होना चाहिए जो वह रास्ता दिखाती है जिसपर चलकर हम यहाँ तक पहुँचे हैं।

कभी कुछ तुम भी कहो तो बातें लय पकडें, यूँ एकतरफा बात करना तकलीफ पहुँचाता है। आशा-निराशा में डूबते तरते..अंधेरों-उजालों से लड़ते जूझते बढ़ रहे हैं हम..कुछ लोग बनाने में लगे हैं तो कुछ बिगाड़ने में...कोई साथ देता है तो कोई साथ छोड़ देता है...सबका अपना महत्त्व है क्योंकि अर्थहीन बेमतलब तो कुछ भी नहीं।

हैप्पी बर्थडे टू यू !


तुम्हारी आवाज़ में....

https://m.youtube.com/watch?feature=youtube_gdata_player&v=VRsTFiJUj8c

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