कहते हैं
दुनिया ठीक वैसी ही नज़र आती है
जैसे हम होते हैं
ऑटो वाला लंबा रास्ता चुनता है
मीटर भागता है
सहकर्मी अपना काम आपकी मेज पर खिसका जाते हैं
जो जैसे जितना फायदा उठा सकता है
उठाता है
हम देखते हैं
चुप रहते हैं
शायद एक पेड़ को वे बस पेड़ की तरह देखते होंगे
या नहीं जानते होंगे
चिड़िया का एक नाम चहक भी होना चाहिए
पेड़ का हरा
और बचपन का खुशी
किताब का रेगमार
हंसी आयी?
जो दिमाग का जंग साफ करे
वही रेगमार
तो क्या जो दिखाई देती है
वो है मेरे अंदर की दुनिया
या वो जो मैं बनाती हूं अपने मन में
हर रोज़
थोड़ी और सुंदर
पिछले दिन से
वही है बस असली दुनिया