चौराहें
जो डराते रहे
कभी लगता है
चार नए रास्तें
पुकारते हैं
और वो बस लालच है, डर नहीं
हर नए रास्ते पर चलने का रोमांच
अपने सफ़र से प्यार है ये
अपने तजुर्बों से मोहब्बत
सच कहूँ
तकलीफों में भी कहीं
अच्छा लगता है
चलना
सोचकर कुछ या कभी बिना सोचे ही
चौराहे पर चुन लेना कोई एक रास्ता
जो लगे कभी कि ग़लती हुई तो
लौट आएँगे
जैसे कहा है मेरे प्रिय कवि ने
कि वहाँ से जो होता है लौटना नहीं होता
नई यात्रा होती है
सपने तो आख़िर देखेंगे ही ।
जो डराते रहे
कभी लगता है
चार नए रास्तें
पुकारते हैं
और वो बस लालच है, डर नहीं
हर नए रास्ते पर चलने का रोमांच
अपने सफ़र से प्यार है ये
अपने तजुर्बों से मोहब्बत
सच कहूँ
तकलीफों में भी कहीं
अच्छा लगता है
चलना
सोचकर कुछ या कभी बिना सोचे ही
चौराहे पर चुन लेना कोई एक रास्ता
जो लगे कभी कि ग़लती हुई तो
लौट आएँगे
जैसे कहा है मेरे प्रिय कवि ने
कि वहाँ से जो होता है लौटना नहीं होता
नई यात्रा होती है
सपने तो आख़िर देखेंगे ही ।
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