Wednesday, 11 September 2019

चौराहें

चौराहें
जो डराते रहे
कभी लगता है
चार नए रास्तें
पुकारते हैं
और वो बस लालच है, डर नहीं
हर नए रास्ते पर चलने का रोमांच
अपने सफ़र से प्यार है ये
अपने तजुर्बों से मोहब्बत
सच कहूँ
तकलीफों में भी कहीं
अच्छा लगता है
चलना
सोचकर कुछ या कभी बिना सोचे ही
चौराहे पर चुन लेना कोई एक रास्ता
जो लगे कभी कि ग़लती हुई तो
लौट आएँगे
जैसे कहा है मेरे प्रिय कवि ने
कि वहाँ से जो होता है लौटना नहीं होता
नई यात्रा होती है

सपने तो आख़िर देखेंगे ही ।

No comments:

Post a Comment

रास्ते

मैं जहां भी गई  भागकर खुद से मेरे सपनों की किर्चें मेरे साथ गईं कहीं भी कभी भी चुभती हुई सी जैसे लंबा सफर तय करना हो पैदल और जूता पैर काटता ...