नया सा
कोई पुराना दिन
पुरानी सी एक नई धुन
ता तई तई ता धित तई तई ता
ता का धी मी
कितना कितना कितना चाहा
कि आख़िर छोड़ दिया
तुम बनो कविता अंतिम
अनंतिम।
कोई पुराना दिन
पुरानी सी एक नई धुन
ता तई तई ता धित तई तई ता
ता का धी मी
कितना कितना कितना चाहा
कि आख़िर छोड़ दिया
तुम बनो कविता अंतिम
अनंतिम।
No comments:
Post a Comment