क्या सब करना है तय करते
एक लंबा वक्त गुज़ारा
कुछ किताबें
कुछ शहर
कई पहाड़ और समंदर
बहुत से छोटे सुख
और बहुत कम बड़े दुःख
फिर
क्या नहीं करना है तय करना चाहा
वो सब होता गया जो नहीं करना तय था
वहाँ खड़े थे हम
जहाँ सब थूकते मुँह पर
दीवार समझकर
अब पता नया है
घर कोई और।
एक लंबा वक्त गुज़ारा
कुछ किताबें
कुछ शहर
कई पहाड़ और समंदर
बहुत से छोटे सुख
और बहुत कम बड़े दुःख
फिर
क्या नहीं करना है तय करना चाहा
वो सब होता गया जो नहीं करना तय था
वहाँ खड़े थे हम
जहाँ सब थूकते मुँह पर
दीवार समझकर
अब पता नया है
घर कोई और।
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