प्रेम रस सूखने पर
जब मन की धरती
बंजर हो जाती है
तब
केवल एक सहारा
तुम्हारी याद आती है
और
ज़िन्दगी फिर तैरने लगती है।
जब मन की धरती
बंजर हो जाती है
तब
केवल एक सहारा
तुम्हारी याद आती है
और
ज़िन्दगी फिर तैरने लगती है।
मैं जहां भी गई भागकर खुद से मेरे सपनों की किर्चें मेरे साथ गईं कहीं भी कभी भी चुभती हुई सी जैसे लंबा सफर तय करना हो पैदल और जूता पैर काटता ...
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