Friday, 14 June 2013

ये आँखें

सफ़र की थकान
मायूसी
और खालीपन
की दास्ताँ हैं
ये आँखें
अब सोना चाहती है
कभी न जागने के लिए
पर डरती हैं
उस डर से जो
इस गहरी नींद से
जागना चाहता है। 

Wednesday, 12 June 2013

. . .झुककर ना गुज़रना पड़े

सब कुछ छोटा है
छोटा दरवाज़ा
छोटी खिड़की
छोटा आदमी
छोटी सोच
कब होगा सब बड़ा
इतना बड़ा
जिसमें से
झुककर ना गुज़रना पड़े। 

Tuesday, 11 June 2013

अतीत का मकबरा

वो  दिन भी आएगा
जब फटेगा
अतीत का मकबरा
और
उसमें दफ़न 
यादें
अपनी सारी सामर्थ्य
से चीख उठेंगी
पूछेंगी सवाल
आखिर क्यों
उन्हें इतनी बेरहमी से
भुला देने की
साज़िश रची गई !

रास्ते

मैं जहां भी गई  भागकर खुद से मेरे सपनों की किर्चें मेरे साथ गईं कहीं भी कभी भी चुभती हुई सी जैसे लंबा सफर तय करना हो पैदल और जूता पैर काटता ...