एक कमरा है
एक खिड़की
एक लड़का है
खिड़की से धूप दीवार पर कोई चित्र सा बनाती है
चित्र पर मेरी पीठ छपती दिखाई देती होगी
पीठ पर चित्र
तस्वीरों में आईने नज़र आते हैं
धूप क्या हमेशा मुट्ठी में भरकर उम्मीद फेंकती होगी कमरे में
या कभी मन को राख भी करती होगी
धूप सबकी अलग-अलग जो होती है
कभी कोई भरम कोई जादू हो जाता है लड़का
उदास लड़का
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