हम ज़मी में एक गड्ढा कर
दफ़न हो जाना चाहते थे
पर ये कोई बड़ी बात नहीं थी
जेब में कुछ सिक्के थे
हम रात के अँधेरे में
छत से कूद जाना चाहते थे
ये भी समस्या नहीं थी
जेब में कुछ सपने थे
हम रस्सी बाँध गले में
झूल जाना चाहते थे
इस पर भी ऐतराज़ नहीं था
साथ में परिवार था
हम नसों को काटना
या किसी रेल के आगे कूद जाना चाहते थे
हम उन्हें बताना चाहते थे
कि हम इनमें से कुछ नहीं चाहते
हम जीना चाहते हैं
हमें कहने नहीं दिया गया
हमें अँधेरे को खोदने का फरमान मिला
कुदाल दे दी हाथ में
जंगल नहीं था वो
बियाबां सा कुछ शायद
अँधेरे में ठीक से देख नहीं पाती आँखें
लेकिन कुछ देर ही होता है ऐसा भी
थेगली से बंद किये सारे रास्ते
जहां से चमक आती थी
खुशबू आती थी।
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