बच्चें अपराधी नहीं होते
जो होता है
वह दरअसल कुछ नहीं
उनका परिवेश है
जिसे हम ही ने रचा
विद्या की कसमें सच्ची थी
क़िताब में रखा पँख भी
सवाल थे बहुत
आँखें आकाश में
इतना हौव्वा सहमा देगा
बचपन को
मत चौंकिए
जिस भी ईश्वर को मानते हो
उसके लिए ही सही
पर इतना मत चौंकिए
चार साल का बच्चा
तमाम बहसों के बाद भी
एक बच्चा ही रहेगा।
जो होता है
वह दरअसल कुछ नहीं
उनका परिवेश है
जिसे हम ही ने रचा
विद्या की कसमें सच्ची थी
क़िताब में रखा पँख भी
सवाल थे बहुत
आँखें आकाश में
इतना हौव्वा सहमा देगा
बचपन को
मत चौंकिए
जिस भी ईश्वर को मानते हो
उसके लिए ही सही
पर इतना मत चौंकिए
चार साल का बच्चा
तमाम बहसों के बाद भी
एक बच्चा ही रहेगा।
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