Monday, 30 October 2017

हदें

कौन सी शक्ति थी 
जो हमें गिरने से पहले जी भर दौड़ने से रोकती थी
दौड़ इतनी लंबी होती कि आग खत्म हो जाती
गिरना इतना लंबा और धीमा होता कि
हवा ख़त्म हो जाती
खिड़की कोई या ईमारत होती
यूँ तमाशा ना होता जीना
और मृत्यु बीच सड़क लटके हुए
पड़ोसियों की इकट्ठा भीड़ के बीच
कुछ जाने पहचाने चेहरे देख सकती

हम हदों में रहे और जिए लोग
हदें तोड़ सकते
और अति ना होती।


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