वो दिन भी आएगा
जब फटेगा
अतीत का मकबरा
और
अपनी सारी सामर्थ्य
से चीख उठेंगी
पूछेंगी सवाल
आखिर क्यों
उन्हें इतनी बेरहमी से
भुला देने की
साज़िश रची गई !
जब फटेगा
अतीत का मकबरा
और
उसमें दफ़न
यादेंअपनी सारी सामर्थ्य
से चीख उठेंगी
पूछेंगी सवाल
आखिर क्यों
उन्हें इतनी बेरहमी से
भुला देने की
साज़िश रची गई !
bahut achi kavita......
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