मैंने खुद से बाहर कुछ नहीं देखा शायद
लिखा भी नहीं
जो कुछ पढ़ा वो भी खुद में
या खुद से जोड़कर
मेरे अंदर 'मैं'
इतना ज़्यादा महसूस करना
और उसका बहुत छोटा हिस्सा
कह पाना
बीमार सा करता है कहीं
कहीं थोड़ा मजबूत भी
मैंने उन लोगों से कभी नहीं कहा
कि कभी कभी
जुगुप्सा जैसा कुछ महसूस होता है
अपनी कीमत तय करती हूँ
बिकने वाली नहीं
इच्छाओं और प्यार वाली
बेमोल कीमत
जुगुप्सा
शब्द किस प्रक्रिया से होकर बनते हैं
बोलने और पढ़ने से ही
अपने अर्थ की छवि खोल देते हैं,
अर्थ जैसे उनके होने में ही है
मैंने किन चीज़ों को सबसे ज़्यादा महत्त्व दिया
शायद शब्दों को
या उनके अर्थ को,
या शायद शब्द के स्रोत को
या व्यक्ति के भाव को
पैन से ज़्यादा पेंसिल को
होना
चीज़ों व्यक्तियों भावनाओं का नहीं
उनकी अधूरी परछाइयों में शायद
ये कविता नहीं
बड़बड़ जैसा कुछ
मैं इंतज़ार करती हूँ
अपनी भरसक ताकत से
चिल्ला सकने की शक्ति का
मैं छोड़ना चाहती हूँ
कई चीज़ों आदतों ? को
मैं ऊपर लिखी बात को मिटाना भी चाहती हूँ
मिटाना केवल यहां से नहीं
अपने दिमाग से भी
मैं माथा चाहे जितना रगड़ डालूं
मिटता कुछ नहीं
कितनी पुरानी बातों की लाशों का एक ढेर
मेरे चारों तरफ उग आता है
श्रापित हूँ मैं भूल ना सकने को।
लिखा भी नहीं
जो कुछ पढ़ा वो भी खुद में
या खुद से जोड़कर
मेरे अंदर 'मैं'
इतना ज़्यादा महसूस करना
और उसका बहुत छोटा हिस्सा
कह पाना
बीमार सा करता है कहीं
कहीं थोड़ा मजबूत भी
मैंने उन लोगों से कभी नहीं कहा
कि कभी कभी
जुगुप्सा जैसा कुछ महसूस होता है
अपनी कीमत तय करती हूँ
बिकने वाली नहीं
इच्छाओं और प्यार वाली
बेमोल कीमत
जुगुप्सा
शब्द किस प्रक्रिया से होकर बनते हैं
बोलने और पढ़ने से ही
अपने अर्थ की छवि खोल देते हैं,
अर्थ जैसे उनके होने में ही है
मैंने किन चीज़ों को सबसे ज़्यादा महत्त्व दिया
शायद शब्दों को
या उनके अर्थ को,
या शायद शब्द के स्रोत को
या व्यक्ति के भाव को
पैन से ज़्यादा पेंसिल को
होना
चीज़ों व्यक्तियों भावनाओं का नहीं
उनकी अधूरी परछाइयों में शायद
ये कविता नहीं
बड़बड़ जैसा कुछ
मैं इंतज़ार करती हूँ
अपनी भरसक ताकत से
चिल्ला सकने की शक्ति का
मैं छोड़ना चाहती हूँ
कई चीज़ों आदतों ? को
मैं ऊपर लिखी बात को मिटाना भी चाहती हूँ
मिटाना केवल यहां से नहीं
अपने दिमाग से भी
मैं माथा चाहे जितना रगड़ डालूं
मिटता कुछ नहीं
कितनी पुरानी बातों की लाशों का एक ढेर
मेरे चारों तरफ उग आता है
श्रापित हूँ मैं भूल ना सकने को।
SUperbbbbbb...👌👌
ReplyDelete