Sunday, 16 October 2016

फ़रेब हैं आँखें

तस्वीरें कभी ना बदलें
जब वक़्त बदले दीवारें
चले जाने के बहुत करीब आकर ठहर जाना

जब भी बहे वक़्त 
टूटकर ना गिरे कांच

फ़रेब हैं आँखें
ज़हर हँसी
भँवर एक उँगली
वो उंगली तुम

ज़बान पलटकर हलक में
थूकती खून रोज़
बाहर आते शब्द झूठे
वो झूठ मैं
प्यार कहने से पहले रूकती हुई साँस।

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