आसमान से जैसे दिखाई देती है धरती
वैसे ही दिखते हो तुम
मेरे घर
मैं अगर न लौट सकूँ
तो तुम हाथ बढ़ा देना
हाथ थाम लूँ ज़रूरी तो नहीं
पर तसल्ली रहेगी
आगे सारा फैलाव
कदम कदम
जितना था आगे सब पार किया
जो ख़त्म किया
अब पीछे है
अकेला होना उतना बुरा नहीं
एक शाम के इंतज़ार में
चौराहें सारे देखेंगे !
वैसे ही दिखते हो तुम
मेरे घर
मैं अगर न लौट सकूँ
तो तुम हाथ बढ़ा देना
हाथ थाम लूँ ज़रूरी तो नहीं
पर तसल्ली रहेगी
आगे सारा फैलाव
कदम कदम
जितना था आगे सब पार किया
जो ख़त्म किया
अब पीछे है
अकेला होना उतना बुरा नहीं
एक शाम के इंतज़ार में
चौराहें सारे देखेंगे !
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