Thursday, 27 July 2017

उल्टियाँ

जो देखा, पढ़ा, सुना,
या जिया
उन सबकी उल्टियाँ

ऐसी भी रातें आई
जब सबसे प्यारे लोग सबसे ज़्यादा क्रूर हुए
ऊँचाइयों पर खड़े होकर
हम रौशनी का एक पेड़ देखेंगे
जो कहीं दूर तेज़ाब की बारिश कर रहा होगा
खिड़की पर खड़े होकर तय करेंगे
सबसे बेहतर रास्ता
उस पेड़ की बारिश है
या यह ऊँचाई
या बस यही एक पल
जिसमें सबसे बड़ा फैसला लिया जाना है

चुप रह जाना ही
शोर को कम करेगा

मुझे इंतज़ार पर छोड़ आओ
तुम जादुई दुनिया में लौट जाओ
वो वक़्त अच्छा था
जब तुम जादूगर
और मैं छोटा बच्चा थे
पेट में ढेर सी मिट्टी है
हाथ में छतरी

बारिश एक कभी ना तय की जा सकने वाली दूरी पर

ये वक़्त मुझे पसंद नहीं

आख़िरी मुलाक़ात
एक दोस्त से
दिवाली से कुछ रोज़ पहले
कुछ दिए, मिठाई
और दरवाज़े पर लटकाने वाली
एक शुभ तोरण
उल्टियाँ

प्यार-प्यार करते हुए चिल्लाने वाले
एक दोस्त का
गाली देकर भाग जाना
उल्टियाँ

एक लड़की की मासूम आँखों पर
खून सने हाथ रखकर
इठलाना कि पहचानो तो ज़रा
उसका घुटने छूते पानी में डूबकर मर जाना
उसपर भी उल्टियाँ

इतनी उल्टियाँ करूँ
कि जो कुछ अन्दर है सब बाहर निकल जाए
नालियों में बह जाए
मुझे खाली कर जाए
मुझमें से मैं निकल जाऊं
बस उल्टियाँ.

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